बाह्य ऋण प्रबंधन एवं सॉवरेन जोखिम संकेतक

भारत की बाह्य ऋण प्रबंधन रणनीति का केंद्रीय फोकस “सततता और विवेकशीलता” पर आधारित है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शेष विश्व के प्रति भारत की वित्तीय देनदारियां, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में, निम्न और प्रबंधनीय स्तर पर बनी रहें। इस ढांचे में दीर्घकालिक परिपक्वता (Long-Term Maturity Profile) को प्राथमिकता दी गई है तथा संप्रभु यानी सरकारी ऋण हिस्सेदारी को सीमित रखा गया है, जिससे वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि और मुद्रा अस्थिरता जैसे बाह्य झटकों से अर्थव्यवस्था को प्रभावी संरक्षण मिलता है।

वैश्विक ऋणदाता एवं बाज़ार पर्यवेक्षक

  • सॉवरेन रेटिंग एजेंसियाँ: एसएंडपी, मूडीज़ और फिच जैसी ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें

वार्षिक सदस्यता लें मात्र 600 में और पाएं...
पत्रिका की मासिक सामग्री, साथ ही पत्रिका में 2018 से अब तक प्रकाशित सामग्री।
प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा पर अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट पेपर, हल प्रश्न-पत्र आदि।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित चुनिंदा पुस्तकों का ई-संस्करण।
पप्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के चुनिंदा विषयों पर वीडियो क्लासेज़।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर अतिरिक्त छूट।
प्रारंभिक विशेष