भारतीय प्रक्षेपण यान: विकासक्रम एवं तकनीकी विन्यास

भारतीय प्रक्षेपण यान इस प्रकार अभिकल्पित किए गए हैं कि वे उपग्रहों को विशिष्ट कक्षाओं, जैसे ध्रुवीय (Polar), सूर्य-तुल्यकालिक (Sun-synchronous), भू-तुल्यकालिक अंतरण (GTO) या निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित कर सकें।

  • समय के साथ, इसरो (ISRO) ने “स्ट्रैप-ऑन बूस्टर्स”, तरल चरणों, स्वदेशी क्रायोजेनिक चरणों और लघु उपग्रह प्रक्षेपण प्रणालियों के माध्यम से अपनी पेलोड क्षमता और मिशन लचीलेपन का विस्तार किया है।

प्रक्षेपण यान : मूल सिद्धांत

  • प्रक्षेपण यान बहु-चरणीय प्रणोदन पर आधारित होते हैं; उपयोग के बाद निष्क्रिय चरणों को अलग कर दिया जाता है, जिससे द्रव्यमान कम होता है और दक्षता बढ़ती है।
  • भिन्न प्रणोदक अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते ....
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