आत्म-सम्मान आंदोलन

सितंबर 2025 में, तमिलनाडु सरकार ने सामाजिक न्याय में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित करते हुए आत्म-सम्मान आंदोलन (Self-Respect Movement) का शताब्दी समारोह मनाया।

मूल विचारधारा और सामाजिक सुधार

  • ई.वी. रामास्वामी 'पेरियार'ने जाति-आधारित समानता की वकालत करने के लिए1925 में आत्म-सम्मान आंदोलन की स्थापना की थी।
  • इस आंदोलन ने पारंपरिक वर्ण और जाति पदानुक्रमको खारिज करते हुए गैर-ब्राह्मणों की गरिमा को प्राथमिकता दी।
  • इसने'आत्म-सम्मान विवाह'की अवधारणा को बढ़ावा दिया, जिसमें ब्राह्मणवादी धार्मिक अनुष्ठानों की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया था।
  • पेरियार ने तर्कसंगत विचारों के प्रसार और गहराई से जमी हुई रूढ़ियों को चुनौती देने के लिए 'कुडी अरासु' पत्रिका का उपयोग ....
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