विकास के इंजन के रूप में सहकारी समितियाँ

सहकारी समितियाँ भारत में जमीनी स्तर की आर्थिक संस्थाएँ हैं, जो छोटे उत्पादकों को संगठित कर बाज़ार तक पहुँच, आय संवर्धन और समावेशी विकास को बढ़ावा देती हैं। प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) 2.0 सुधारों और दुग्ध सहकारी क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण ने ग्रामीण आय, रोज़गार और आर्थिक लचीलापन (Economic Resilience) मज़बूत किया है।

लाभार्थी वर्ग

  • लघु एवं सीमांत किसान।
  • दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक।
  • सहकारी समितियों की महिला सदस्य।
  • ग्रामीण परिवार एवं SHG-सम्बद्ध उत्पादक।

पृष्ठभूमि

  • भारत में सहकारी आंदोलन की शुरुआत 1904 में हुई।
  • श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड), 1970 ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाया।
  • 2021 में सहकारिता ....

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