जैव-अर्थव्यवस्था के विकास क्षेत्र

जैव-अर्थव्यवस्था से आशय उन समस्त आर्थिक गतिविधियों से है, जो जैविक प्रक्रियाओं एवं जैविक संसाधनों पर आधारित होती हैं। भारत की BioE3 नीति (बायोटेक्नोलॉजी फ़ॉर इकॉनॉमी, एम्प्लॉयमेंट एवं एन्वायरनमेंट) रासायनिक-आधारित विनिर्माण से जैव-आधारित विनिर्माण की ओर संक्रमण हेतु एक रणनीतिक रोडमैप प्रदान करती है।

मूल अवधारणा

यह नीति ‘बायो-फाउंड्री’ एवं उच्च-क्षमता वाले जैव-विनिर्माण (Biomanufacturing) के माध्यम से जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादों के सतत विकल्प विकसित करने पर केंद्रित है।

प्रौद्योगिकी कैसे कार्य करती है?

  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering): वैज्ञानिक सूक्ष्मजीवों (जैसे यीस्ट या बैक्टीरिया) के डीएनए में संशोधन कर उन्हें सूक्ष्म “जैव-कारखानों” के रूप में विकसित करते हैं।
  • सटीक किण्वन (Precision ....


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