भुगतान संतुलन प्रवृत्तियाँ एवं बाह्य क्षेत्र स्थिरता

भारत की भुगतान संतुलन (BoP) स्थिति अब एक सुदृढ़ बैलेंस शीट के रूप में विकसित हो चुकी है, जिसकी विशेषता है नियंत्रित चालू खाते का घाटा (CAD) और मज़बूत पूंजी खाते का अधिशेष। बाह्य क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव हुआ है, जहाँ सेवाओं के निर्यात में उछाल और रिकॉर्ड स्तर पर प्रेषण (Remittances) ने वस्तु व्यापार घाटे को प्रभावी रूप से पाट दिया है, जिससे अर्थव्यवस्था वैश्विक अस्थिरता से सुरक्षित हुई है।

वैश्विक व्यापारी एवं वित्तीय हितधारक

  • सेवा क्षेत्र: आईटी, बिज़नेस प्रोसेस मैनेजमेंट और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), जो शुद्ध निर्यात अधिशेष को बढ़ा रहे हैं।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs): वैश्विक ....
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