ऋण प्रबंधन

राजकोषीय घाटा सरकार के कुल उधारों को दर्शाता है जो उसके व्यय और गैर-ऋण प्राप्तियों के बीच के अंतर को पाटने के लिए आवश्यक हैं। एफआरबीएम अधिनियम का उद्देश्य घाटे में कमी और ऋण प्रबंधन के लक्ष्य निर्धारित करके राजकोषीय अनुशासन को संस्थागत बनाना है। सार्वजनिक ऋण प्रबंधन में वांछित जोखिम और लागत स्तरों पर सरकारी उधारों को कुशलतापूर्वक जुटाने और प्रबंधित करने की रणनीतियां शामिल हैं।

हालिया प्रगति

  • वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.8% था, जो पिछले वित्त वर्ष के 5.9% से कम है। सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष ....
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