रचनात्मक अर्थव्यवस्था

रचनात्मक अर्थव्यवस्था, जिसे प्रायः ऑरेंज इकोनॉमी कहा जाता है; संस्कृति, प्रौद्योगिकी और वाणिज्य के संगम से उभरता हुआ एक उच्च-विकासशील आर्थिक क्षेत्र बन चुकी है। यह अब केवल भारत की सॉफ्ट पावर तक सीमित न रहकर एक ठोस आर्थिक संपदा (Hard Economic Asset) में परिवर्तित हो गई है।

  • इस परिवर्तन का प्रमुख आधार है क्रिएटर इकोनॉमी (इन्फ्लुएंसर, स्ट्रीमर आदि) तथा AVGC-XR क्षेत्र (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी) जिसका फोकस अब सेवा-आउटसोर्सिंग से आगे बढ़कर बौद्धिक संपदा (IP) सृजन पर केंद्रित हो गया है।

लाभार्थी वर्ग

  • गिग-इकोनॉमी क्रिएटर्स: यूट्यूबर्स, डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और स्ट्रीमर्स, ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें

वार्षिक सदस्यता लें मात्र 600 में और पाएं...
पत्रिका की मासिक सामग्री, साथ ही पत्रिका में 2018 से अब तक प्रकाशित सामग्री।
प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा पर अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट पेपर, हल प्रश्न-पत्र आदि।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित चुनिंदा पुस्तकों का ई-संस्करण।
पप्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के चुनिंदा विषयों पर वीडियो क्लासेज़।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर अतिरिक्त छूट।
प्रारंभिक विशेष