सामान्य अध्ययन , मॉडल टेस्ट पेपर- 2

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कुल सवाल: 99

स्वतंत्रता आंदोलन में समाजवाद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन:

  1. मानवेंद्रनाथ राय का मत था कि भावी समाजवादी क्रांति में औपनिवेशिक क्रांतियों का प्रमुख स्थान होगा।
  2. राय की धारणा थी कि औपनिवेशिक पूँजीवाद साम्राज्यशाही से गठबंधन कर प्रतिक्रियावादी हो गया है, अतः क्रांतिकारी दल उसके साथ संयुक्त मोर्चा नहीं बना सकते।
  3. बोल्शेविक क्रांति के बाद भारत में साम्यवादी संगठन बने और सन् 1924 तक अखिल भारतीय साम्यवादी दल का गठन हुआ, जिसे शीघ्र ही अवैध घोषित कर दिया गया।
  4. कांग्रेस समाजवादी पार्टी की स्थापना सन् 1934 में हुई, जिसमें जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्रदेव, डॉ. राममनोहर लोहिया आदि प्रमुख नेता थे।
  5. इन समाजवादियों का उद्देश्य कांग्रेसी मंच द्वारा समाजवादी ढंग से स्वराज्यप्राप्ति और उसके बाद समाजवाद की स्थापना था।

निष्कर्ष:

  1. भारतीय साम्यवादियों ने अधिकांशत: राय की नीति का अनुसरण करते हुए राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग रहने की प्रवृत्ति अपनाई।
  2. भद्र अवज्ञा आंदोलन की असफलता और 1929 के आर्थिक संकट ने अनेक राष्ट्रभक्तों को समाजवाद की ओर आकर्षित किया।
  3. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस समाजवादी दल कांग्रेस के अंदर ही बना रहा और कभी अलग नहीं हुआ।

उपर्युक्त कथनों के आधार पर कौन-से निष्कर्ष सही हैं?

A
केवल 1 और 2
B
केवल 2 और 3
C
केवल 1 और 3
D
1, 2 और 3
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